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 14:05 | 20/Dec/2007 | 4 Comment(s)
aahista aahista

आँखो के रास्ते से आता हैं कोई आहिस्ता आहिस्ता

सपने मेरे चुराता हे कोई आहिस्ता आहिस्ता

दिल मैं उत्तर जाता हैं कोई आहिस्ता आहिस्ता
प्यार भरे नगमें सुनता हैं कोई आहिस्ता आहिस्ता

दूर रह कर भी मुस्करता हैं कोई आहिस्ता आहिस्ता
संग चलने को बुलाता हे कोई आहिस्ता आहिस्ता

कांटो भारी बाहें फेलता हे कोई आहिस्ता आहिस्त

भरे ज़ख़्मो को नम करता हे कोई आहिस्ता आहिस्ता

ए साकी तेरे मेखाने फिर डूब जाने को
संगदिल बुलाता हे कोई आहिस्ता आहिस्ता

मन मोहन

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 10:15 | 7/Dec/2007 | 3 Comment(s)
Bachpan Se aab tak

बचपन की यादें याद आती हें हज़ारों खुशियाँ भर लाती हैं
वो गुज़रा लम्हा याद आता हें आखें मेरी भर जाती जाती हँ

माँ की थपकी याद आती हें याद आता हॅ पापा का प्यार
बादशाह थे हम भी सड़को के घर के थे हम राज दुलार

हो छोटा सा भी गम अगर शाह ना पाती थी वो
फेला कर अपना आँचल ममता से सहलाती थी वो

था चौड़ा सीना पापा का जो आने ना देते दुशमन पास
बड़े बड़े से भी लड़ भिड़ने की हममें थी तब कितनी आस

छूट गया जो दामन उनका पल मे ले कर खुशियाँ हज़ार
बचपन गुजरा आई ज़बानी फिर मिल ना पाया वेसा प्यार

अब चिंता कुछ बन जाने की करके सबसे आँखें चार
पेसा पेसा करते रहते चाहे घर हो या हो यार

घर में हें खाने की चिंता बाहर दिखाते दौलत अपर
पल में शोला पल में शबनम लगती हें वो गुलबहार

चंद्रमुखी, सूरजमुखी, बन जाती हॅ जुवालामुखी
हो गये हम दो से चार ना तुम सुखी ना हम सुखी

चली गयी वो दौलत सारी जिसका था हमें गुबार
बुलबुला था पानी का जो बह गया बेसुमर

अब तो इंतजार हें उस पिता का जो जाग का हें पालनहार
बरसा दे तू दौलत अपनी हो जाऊं मॅ मालामाल





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